सहायक संधि Subsidiary alliance in Hindi

सहायक संधि Subsidiary Alliance क्या है ?

सहायक संधि Subsidiary alliance.

सहायक संधि क्या है ? Sahayak Sandhi in Hindi और सहायक संधि का अर्थ क्या है ? लगातार विभिन्न परीक्षाओं में ये सवाल पूछे जाते रहे हैं कि सहायक संधि कब हुई ? और सहायक संधि का जन्मदाता कौन है ?
तो आज के इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि सहायक संधि स्वीकार करने वाला पहला शासक कौन था ? तथा ये भी जानेंगे कि सहायक संधि ने किस तरह भारत के देशी रियासतों को अपने उपनिवेश के जाल में कैद कर लिया।

सहायक संधि Subsidiary alliance की भूमिका और अर्थ :

सहायक संधि Subsidiary alliance मूलतः डुप्ले द्वारा पहली बार भारत में प्रयोग किया गया था जिसके कालांतर में लार्ड वेलेजली ने व्यापक रूप से विस्तार स्थापित किया। यह संधि एक तरह से मैत्री संधि थी जिसका उद्देश्य भारत में अंग्रेजी सत्ता एवं साम्राज्य का विस्तृत विस्तार करना था। यह एक तरह से भारतीय शासकों व नवाबों पर अंग्रेजों द्वारा किया गया कूटनीतिक उपनिवेश का प्रकार था जिसका आर्थिक वहन भारतीय राजाओं के मद से प्रस्तावित था।

सहायक संधि Subsidiary alliance साधारणत भारतीय राजाओं के खर्च पर अंग्रेजों की सैन्य विस्तार की नीति थी जिसने कुछ ही वर्षों में मैसूर, तंजौर,अवध जैसी 12 देशी रियासतों को अपनी गिरफ्त में ले लिया और कुछ ही वर्षों में समस्त रियासतें अंग्रेजी सत्ता के मात्र कठपुतली बनकर सिमट गई।

sahayak sandhi ना सिर्फ अंग्रेजों की साम्राज्य विस्तार की रूपरेखा थी अपितु एक पक्षपातपूर्ण, जबरदस्ती थोपा गया बंदिशों की कार्यप्रणाली थी।

सहायक संधि की विशेषताएं :

लार्ड वेलेजली की सहायक संधि की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं जिसने देशी रियासतों की दशा और दिशा बदल दी :

(1) सहायक संधि Subsidiary alliance के अनुसार भारतीय राजाओं के विदेशी संबंध ( Foreign Relation) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन होंगे तथा बिना पूछे वह किसी से भी कोई युद्ध नहीं करेंगे। सारा विचार-विमर्श यह कंपनी तय करेगी कि किससे संबंध स्थापित करना है और किससे नहीं।

(2) कोई भी राज्य ईस्ट इंडिया कंपनी के अनुमति के किसी भी यूरोपीय व्यक्ति को अपनी सेवा में नहीं लगाएंगे तथा हर एक राज्य को अपनी राजधानी में एक अंग्रेज रेजिडेंट रखना अनिवार्य होगा।

(3) राज्य को अपने क्षेत्र में रक्षा कार्य हेतु अंग्रेजी सेना को रखना अनिवार्य होगा जिसका सारा आर्थिक वहन उस राज्य द्वारा भुगतान किया जाएगा और सेना के नेतृत्व का बागडोर ब्रिटिश अधिकारियों के हाथों में होगा।

(4) सहायक संधि की खास विशेषताओं में एक विशेषता यह भी थी कि ईस्ट इंडिया कंपनी किसी भी राज्य के आंतरिक मामलों में कोई भी हस्तक्षेप नहीं करेगी तथा समय अनुसार राज्य को उनके शत्रुओं से रक्षा भी करेगी। सहायक संधि के अंतर्गत शामिल हुए राज्यों के नाम :

सहायक संधि Subsidiary alliance सबसे पहले सन 1798 में हैदराबाद के निजाम से की गई।तथा धीरे धीरे एक चरण प्रक्रिया के माध्यम से ईस्ट इंडिया कंपनी ने कई देशी रियासतों को अपने चंगुल में फंसा लिया। सहायक संधि स्वीकार करने वाले राज्यों के नाम निम्नलिखित हैं :

1.हैदराबाद के निजाम
2.मैसूर
3.तंजौर
4.अवध
5.पेशवा
6.बराड़ के भोंसले
7.सिंधिया
8.जोधपुर
9.जयपुर
10.मचछेड़ी
11.बूंदी
12.भरतपुर

सहायक संधि की लाभ, हानियां और निष्कर्ष :

इस संधि का सबसे अधिक लाभ ईस्ट इंडिया कंपनी को हुआ और सर्वाधिक हानि भारतीय रियासतों को उठानी पड़ी। धीरे-धीरे भारतीय रियासतें कमजोर एवं पंगु होने लगीं और सारी स्वतंत्राएं अंग्रेजों की मुठ्ठी में हस्तांतरित होती गई फलत देसी देशी रियासतें अंग्रेजों की दया दृष्टि पर निर्भर हो गईं।

सहायक संधि से विभिन्न परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न :

✓ लार्ड वेलेजली कौन था ?
लार्ड वेलेजली सन 1796 से लेकर 1805 तक भारत का गवर्नर था। लार्ड वेलेजली ने सहायक संधि को प्रतिपादित किया जिसके कारण उसे सहायक संधि का जन्मदाता भी कहा गया है।

✓ फोर्ट विलियम की स्थापना किसने की ?
फोर्ट विलियम की स्थापना लार्ड वेलेजली ने की थी जिसे सहायक संधि का प्रतिपादक भी कहा जाता है।

✓ सहायक संधि का जन्मदाता कौन है ?
लार्ड वेलजली को सहायक संधि का जन्मदाता कहा जाता है। यद्यपि सहायक संधि का पहला प्रयोग डुप्ले द्वारा पहली बार भारत में किया गया था।

✓ सहायक संधि स्वीकार करने वाला पहला शासक कौन था ?
सहायक संधि को स्वीकार करने वाला पहला शासक हैदराबाद के निजाम थे जिन्होंने सन 1798 में पहली बार सहायक संधि स्वीकार किया।

✓सहायक संधि किसने और कब लागू की ?
सहायक संधि की शुरुआत लार्ड वेलेजली ने सन 1798 में की थी।

✓ सहायक संधि को सुनिश्चित एवं व्यापक स्वरुप किसने प्रदान किया
लार्ड वेलेजली

✓सहायक संधि किसकी नीति थी ? और सहायक संधि का मकसद क्या था ?
सहायक संधि लार्ड वेलजली की नीति थी जिसका मकसद भारत में अंग्रेजी सत्ता एवं ईस्ट इंडिया कंपनी की साम्राज्य का विस्तृत विस्तार करना था।

✓ सहायक संधि की प्रमुख शर्ते क्या थीं ?
सेना का कमान ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा और भुगतान देशी रियासतों द्वारा करना था। राज्य की राजधानी में एक अंग्रेज रेजिडेंट की नियुक्ति करना। बिना कंपनी के इजाजत के कोई यूरोपीय व्यक्ति की नियुक्ति करना इत्यादि।

✓ सहायक संधि के प्रभाव या परिणाम क्या थे ?
देशी रियासतों की स्वतंत्रता अंग्रेज़ों की मुठ्ठी में हस्तांतरित हो गई। शासक व नवाब अंतत ईस्ट इंडिया कंपनी पर आश्रित हो चले। दोनों तरह से नुकसान देशी रियासतों को था और मुनाफा अंग्रेजों को था।

✓ सहायक संधि से अंग्रेजों को क्या लाभ हुए ?
कम्पनी का विस्तार हुआ विशाल सेना की प्राप्ति हुई
_ फ्रांसीसी प्रभाव का अंत और ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार होना
_ भारतीय शासकों पर नियंत्रण स्थपित करना

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